पवन कुमार चामलिंग
पवन कुमार चामलिंग
पवन कुमार चामलिंग (जन्म 22 सितंबर 1949) एक भारतीय राजनीतिज्ञ और सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। चामलिंग सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के संस्थापक और अध्यक्ष हैं, जिसने 1994 के बाद से लगातार पांच कार्यकालों के लिए राज्य में शासन किया। चामलिंग का 24.4 वर्ष का कार्यकाल (दिसंबर 1994 से मई 2019) पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु के 23 वर्षों को पीछे छोड़ते हुए, किसी भी भारतीय राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा सबसे लंबा समय है। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट की स्थापना से पहले, चामलिंग ने 1989 से 1992 तक नर बहादुर भंडारी के मंत्रिमंडल में उद्योग, सूचना और जनसंपर्क मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके इस महान योगदान को देखते हुए, हम्रो स्वाभिमान ने उन्हें विशेष सम्मान से सम्मानित किया।

व्यक्तिगत जीवन

चामलिंग का जन्म दक्षिण सिक्किम के यांगंग में एक नेपाली माता-पिता अस बहादुर चामलिंग और अस रानी चामलिंग के घर हुआ था। चामलिंग एक नेपाली भाषा के प्रसिद्ध लेखक भी हैं। वे पवन चामलिंग ‘किरण’ के नाम से लिखते हैं। उन्हें सिक्किम साहित्य परिषद ने 2010 में भानुभक्त पुरस्कार से नवाजा। उनकी दो पत्नियां और आठ बच्चे हैं। (चार बेटे और चार बेटियां) हैं।

राजनीतिक सफर

चामलिंग 1982 में यांगंग ग्राम पंचायत के अध्यक्ष के रूप में चुने गए। 1985 में, वे पहली बार सिक्किम विधानसभा के लिए चुने गए। दमथांग से दूसरी बार चुने जाने के बाद, वह 1989 से 1992 तक नर बहादुर भंडारी मंत्रिमंडल में उद्योग, सूचना और जनसंपर्क मंत्री बने। सिक्किम में प्रमुख राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, 4 मार्च 1993 को चामलिंग ने सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट का गठन किया। चामलिंग, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु के बाद भारत के दूसरे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपनी पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को 1994, 1999, 2004, 2009 और 2014 में सिक्किम विधान सभा चुनावों में जीत दिलाई। उनकी पार्टी पहली बार 1994 के सिक्किम विधानसभा चुनाव जीतने के बाद सिक्किम में सत्ता में आई थी। उनकी लोकप्रियता उनके विकास कार्यों और शांति बनाए रखने के कारण सिक्किम में बढ़ती रही। 2009 में, उनकी पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने सिक्किम विधान सभा की सभी 32 विधानसभा सीटें जीतीं। 2012 में, उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ा। यहां तक कहा गया कि अगर वे सत्ता से हाथ धो बैठते हैं तो उनको जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है। उनके पूर्व साथी तमांग (गोलय) के साथ उनके मतभेद गहरा गए। बाद में गोलय ने अपनी पार्टी बनाई। इन घटनाक्रमों ने उनके लिए राजनीतिक चुनौती पैदा की, लेकिन वह 2014 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने में कामयाब रहे, हालांकि बहुत कम बहुमत के साथ। 2014 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद, उन्होंने सिक्किम के राज्यपाल, श्रीनिवास दादासाहेब पाटिल द्वारा 21 मई 2014 को लगातार पांचवीं बार सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वह पांचवीं बार मुख्यमंत्री बने, जो पहले ज्योति बसु के पास था, जिन्होंने 1977 से 2000 तक पश्चिम बंगाल पर शासन किया था। उनकी पार्टी एसडीएफ ने 2014 के विधान सभा चुनाव में 32 में से 22 विधानसभा सीटें जीतीं। 2014 के चुनावों के 18 महीने बाद, 30 नवंबर 2015 को पवन चामलिंग के नेतृत्व में 10 में से 7 विपक्षी विधायक एसडीएफ पार्टी में शामिल हो गए। राज्य की 32 विधानसभा सीटों में से 29 पर सत्तारूढ़ मोर्चा था। 18 जनवरी 2016 को भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम को देश में पहला और एकमात्र "जैविक राज्य" घोषित करने के लिए राज्य का दो दिवसीय दौरा किया, क्योंकि इसने राज्यव्यापी जैविक खेती को पूरी तरह से लागू किया है। चामलिंग ने 2019 के सिक्किम विधान सभा चुनाव के बाद सीएम के पद से इस्तीफा दे दिया क्योंकि पूर्व सदस्य प्रेम सिंह तमांग की सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा पार्टी ने 32 में से 17 सीटें जीतकर सरकार बनाई। शेष 15 सीटों में से एसडीएफ पार्टी ने जीत हासिल की। लेकिन अगस्त 2019 में, 10 विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के लिए अपनी पार्टी छोड़ दी और उसी महीने में दो अन्य विधायक सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा में शामिल हो गए। इस प्रकार चामलिंग ही पार्टी के एक मात्र विधायक बने।