दिल कुमारी भंडारी
दिल कुमारी भंडारी
दिल कुमारी भंडारी, सिक्किम की पूर्व और संसद की पहली महिला सदस्य (लोकसभा) हैं। वह 2012 तक भारतीय गोरखाओं के संगठन भारतीय गोरखा परिषद की अध्यक्ष भी रहीं। वह लगातार नेपाली भाषी लोगों के लिए काम करती रही हैं, उनका सबसे उल्लेखनीय योगदान नेपाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का रहा है। उनकी भाषा और नेपाली संस्सकृति के प्रति इस महान योगदान को देखते हुए हाम्रो स्वाभिमान ने उन्हें हाम्रो गौरव अवॉर्ड से सम्मानित किया।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

दिल कुमारी भंडारी का जन्म 14 मई 1949 को भारत के दार्जिलिंग जिले के बाना पुत्ताबोंग गाँव में हुआ था। वह एक उच्च सुसंस्कृत और पारंपरिक राई परिवार से आती हैं। किन्हीं कारणों से वे विश्वविद्यालय की पढ़ाई नहीं कर पाईं। दिल कुमारी भंडारी दो बार 1985 से 27 नवंबर 1989 तक और 20 जून 1991 से 10 मई 1996 तक सिक्कम से लोकसभा के लिए चुनी गईं। उन्होंने एक शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार के रूप में काम किया।

राजनीतिक करिअर

1984 के लोकसभा चुनाव में सिक्कम से नर बहादुर भंडारी विजयी हुए। लेकिन नर बहादुर भंडारी को राज्य के मुख्यमंत्री बनने के लिए राज्य विधानसभा के लिए चुने जाने के कारण, संसद में अपनी सीट छोड़नी पड़ी। परिणामस्वरूप, अप्रैल 1985 में उप-चुनाव का आदेश दिया गया जिसमें दिल कुमारी भंडारी सहित नौ उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया। लेकिन ग्यारहवें घंटे में, दिल कुमारी भंडारी को छोड़कर सभी ने अपना नामांकन वापस ले लिया। परिणामस्वरूप, उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। वर्ष 1989 में सिक्किम से 9वें लोकसभा चुनाव में, दिल कुमारी भंडारी (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस) को नंदू थापा के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी। वर्ष 1991 में 10वीं लोकसभा चुनाव में, दिल कुमारी भंडारी, जो सिक्किम संग्राम परिषद में वापस आ गई थीं, ने भारी मतों से चुनाव जीतीं।

नेपाली भाषा और मान्यता

नेपाली भाषा को भारतीय संविधान में जगह दिलाने के लिए काफी समय से आंदोनल चल रहे थे। लाखों भारतीय नेपालियों की इससे आस्था जुड़ी हुई थी। भाषा आंदोलन काफी समय तक चला। अनेकों साहित्यकार, भाषाविद और अन्य क्षेत्रों से जुड़े नेपाली भाषी लोग नेपाली भाषा को भारतीय संविधान में स्थान दिलाने में प्रयासरत थे। इसमें सिक्किम से सांसद श्रीमती दिल कुमारी भंडारी ने अहम रोल निभाया। अंततः 31 अगस्त, 2992 को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में नेपाली भाषा शामिल हो गई। तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसकी स्वीकृति प्रदान की। यह भारतीय नेपालियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन था।

निजी जीवन

उन्होंने नर बहादुर भंडारी से शादी की, जो बाद में 28 मार्च 1986 तक सिक्किम के मुख्यमंत्री बने। वह एक बेटे और तीन बेटियों की मां हैं

पुरस्कार और मान्यता

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में नेपाली भाषा को शामिल करने में उनके योगदान के लिए 2016 में सिक्किम सेवा रत्न दिया गया, जो राज्य का दुसरा सर्वोच्च पुरस्कार है। इसी तरह से उनकी राजनीतिक सेवाओं को देखते हुए हाम्रो स्वाभिमान ने उनको हाम्रो गौरव अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया।